शनिवार, 4 दिसंबर 2021

नाबालिक का अपहरण कर बलात्कार करने वाले आरोपी को आजीवन कारावास।*




*नीमच। श्री विवेक कुमार श्रीवास्तव, विशेष न्यायाधीश (पाॅक्सो एक्ट), नीमच* द्वारा 17 वर्षीय नाबालिक बालिका का अपहरण कर बलात्कार करने वाले आरोपी गुलाम हुसैन पिता कल्लु खां कुरैशी, उम्र-20 वर्ष, निवासी अंबेडकर नगर, खारीकंुआ, जिला नीमच को धारा 363, 366, 376 भारतीय दण्ड संहिता, 1860 एवं धारा 3/4 लैंगिक अपराधों से बालको का सरंक्षण अधिनियम, 2012 के अंतर्गत दोषी पाते हुए आजीवन कारावास एवं कुल 20,000रू. जुर्माने से दण्डित किया।


विशेष लोक अभियोजक श्री जगदीश चैहान द्वारा घटना की जानकारी देते हुए बताया कि पीडिता 17 वर्ष की होकर ग्राम जमुनिया कला में रहती हैं तथा पूर्व में वह दशहरा मैदान स्थित शासकीय कन्या विद्यालय में पढाई करने हेतु बस से नीमच आती जाती थी। आरोपी बस स्टेण्ड स्थित आटो पार्टस की दुकान पर नौकरी करता था, जिससे पीडिता की आते जाते पहचान हो गई थी। आरोपी द्वारा पीडिता को बहला फुसला कर एक मोबाईल दे दिया था, जिससे वह पीडिता से बात करता था। घटना दिनांक 09.10.2019 को पीडिता घर से सिलाई सीखने का बोलकर गई थी जो करीब 4 घंटे के बाद भी वापस नहीं आई तो पीडिता के परिवार वालो ने सिलाई सीखाने वाले टेलर से पूछताछ करी तो उसने बताया की 03 दिन से छुटटी होने से पीडिता उसके वहां नहीं आई फिर पीडिता के परिवार वालों ने पीडिता की आसपास व रिश्तेदारी में तलाश की किंतु वह नहीं मिली व इसी दौरान पीडिता की माता की तबियत खराब होने से पीडिता के मामा ने दिनांक 11.10.2019 को शंका के आधार पर आरोपी के विरूद्ध थाना नीमच सिटी में प्रथम सूचना रिपोर्ट लेखबद्ध कराई, जिस पर से अपराध क्रमांक 451/19, धारा 363/34 भारतीय दण्ड संहिता 1860 का पंजीबद्ध कर विवेचना में लिया गया। विवेचना के दौरान दिनांक 14.10.2019 को पुलिस द्वारा हुसैन टेकरी दरगाह के बहार, जावरा (रतलाम) से पीडिता को दस्तयाब किया व आरोपी को गिरफ्तार किया गया। पीडिता द्वारा पुलिस को बताया गया कि घटना दिनांक को आरोपी ने मोबाईल से उसे भाटखेडा बुलाया किन्तु जब पीडिता द्वारा इंकार किया गया तो आरोपी द्वारा धमका कर कि अगर नहीं आई तो वह उसके माँ-बाप व उसको मार डालेगा। डर के कारण पीडिता भाटखेडा गई, जहाँ से आरोपी उसे जावरा से होते हुए अजमेर (राजस्थान) के होटल गुलाब पैलेस में ले गया, जहाँ आरोपी द्वारा पीडिता से बलात्कार किया गया, फिर व पीडिता को वापस जावरा लेकर आया जहाँ से पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पीडिता द्वारा बताई घटना के आधार पर पुलिस धारा 366, 376 भारतीय दण्ड संहिता, 1860 एवं लैंगिक अपराधों से बालको का सरंक्षण अधिनियम, 2012 की धारा 3/4 का ईजाफा करते हुए अन्य आवश्यक विवेचना पूर्ण कर अभियोग-पत्र माननीय विशेष न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया।


अभियोजन द्वारा माननीय न्यायालय के समक्ष विचारण के दौरान पीड़िता सहित भी महत्वपूर्ण साक्षीगण के बयान कराकर आरोपी के विरूद्ध अपराध को संदेह से परे प्रमाणित कराकर उसके कठोर दण्ड से दण्डित किये जाने का तर्क रखा गया। माननीय विशेष न्यायाधीश द्वारा आरोपी को भारतीय दण्ड संहिता, 1860 की धारा 363 में 7 वर्ष सश्रम कारावास व 5000रु जुर्माना, धारा 366 में 10 वर्ष का सश्रम कारावास व 5000रु जुर्माना व धारा 376 में आजीवन कारावास व 5000रु जुमाना तथा लैंगिक अपराधों से बालको का सरंक्षण अधिनियम, 2012 की धारा 3/4 में आजीवन कारावास व 5,000रू जुर्माना, इस प्रकार आरोपी को आजीवन कारावास व कुल 20,000रु जुर्माने से दण्डित करते हुए जुर्माने की कुल रकम 20,000रु को पीडिता को प्रतिकर के रूप में प्रदान किये जाने का आदेश भी दिया गया। न्यायालय में शासन की ओर से पैरवी *विशेष लोक अभियोजक श्री जगदीश चैहान* द्वारा की गई व सहयोग *श्री चंद्रकांत नाफडे, एडीपीओ* द्वारा किया गया।



बुरहानपुर जिले में 85 लाख के चैक अनादरण मामले में एक संस्था के मां एवं बेटे को 1-1 साल की जेल और 1.39 करोड रूपये हुआ जुर्माना*

 बुरहानपुर - पिछले 8 साल से लंबित 85 लाख रूपये के चैक अनादरण के मामले के बहुप्रतिक्षित महत्वपुर्ण प्रकरण में बुरहानपुर न्यायलय ने महत्वपुर्ण फैसला देते हुए चैक जारी कर्ता संस्था सिद्धीविनायक पावरलुम बुनकर सहकारी संस्था की अध्यक्ष और उपाध्यक्ष मां (श्रीमती रजनी सोनी) तथा बेटे (श्री विशाल सोनी) सहित 3 को 1-1 साल जेल की सजा के साथ-साथ 1.39 करोड का जुर्माने का आदेश पारित किया। उल्लेखनिय है कि परिवादी श्रीराम तोषनीवाल की ओर से अधिवक्ता श्री मनोज कुमार अग्रवाल ने यह केस वर्ष 2014 में न्यायालय में लगाया था और तब से 8 साल बाद वर्तमान जे. एम.एफ.सी. बुरहानपुर ( श्री आयुष कनेल साहब) के न्यायालय ने यह फैसला सुनाया। परिवादी श्रीराम तोषनीवाल की ओर से पैरवीरत अधिवक्ता श्री मनोज कुमार अग्रवाल से 8 वर्ष की देरी के संबंध में पूछे जाने पर उन्होने बताया कि, हालांकि चैक अनादरण के मामलों में 6 माह के भीतर प्रकरण को निपटाए जाने का भरपुर प्रयास करने का कानून है, किंतु यह भी आदेश है कि आरोपी / अभियुक्त को बचाव का पुरा पुरा मौका मिलना चाहिए जिसका सहारा लेकर इस मामले में ऐसे कई मौके आए जब आरोपीगण की ओर से बार-बार दस्तावेजो के प्रगटीकरण के लिए अनेको आवेदन तथा उनकी निरस्ती के बाद इन आदेशो की अनेको रिवीजन तथा उन रिविजनो की निरस्ती के बाद मा. उच्च न्यायालय में याचिका के अलावा, मा. न्यायालय के पीठासीन अधिकारी के बदले जाने के आवेदन तथा कोविड- 19 महामारी की अवधि जैसे कई कारण रहे जिस वजह से उक्त मामले के निराकरण में अप्रत्याशित 8 वर्ष से अधिक का समय लग गया। अधिवक्ता श्री मनोज कुमार अग्रवाल ने यह भी बताया कि न्यायालय की ओर से शीघ्रअतिशीघ्र अंतिम निराकरण करने की कोशिश करते हुए आरोपीगण के विरुद्ध व्यर्थ के आवेदनों पर जुर्माना भी लगाया गया किंतु ऐसे जुर्माने की रकम उक्त प्रश्नाधीन चैक की रकम 85 लाख के मुकाबले लगभग नहीं के बराबर होती थी ऐसी स्थिती में उक्त जुर्माने से आरोपीगण पर कोई प्रभाव नही पडते हुए ऐसे व्यर्थ के आवेदन के कारण भी उपरोक्त अप्रत्याशित विलंब हुआ। इसके अलावा समय गुजरने के साथ विलंब होने से सामान्यतः तीन से चार वर्ष की अवधि के दौरान न्यायालय के पीठासीन अधिकारी का तबादला होने से और फिर नए पीठासीन अधिकारी द्वारा प्रकरण तथा आरोपीगण के कंडक्ट को समझने में देरी होना भी विलंब का एक अतिरिक्त कारण रहा। परिवादी के अधिवक्ता श्री मनोज कुमार अग्रवाल ने यह भी कहा कि प्रकरण का सुखद पहलु यह भी है कि इस मामले में पिछले 8 साल अप्रत्याशित विलंबन के दौरान प्रारंभ से अंत तक पहुंचने तक एक ही अधिवक्ता के रूप में उन्होने (श्री मनोज कुमार अग्रवाल) ही मामले को कडक्ट किया ऐसी स्थिती में प्रकरण का कोई भी पहलु क्षीण / विलोपित नही हुआ, अन्यथा अधिवक्ता बदल जाने से भी कभी-कभी प्रकरण को नुकसान पहुंचने की संभावना रहती है। अधिवक्ता श्री अग्रवाल ने कहा कि उनके लिए यह केवल एक कस था, जिसमें वे अपने पक्षकार द्वारा दिए गए मामले के तथ्यों को कानून के अनुसार मा. न्यायालय के समक्ष रखकर मा. न्यायालय को अपने पक्षकार के पक्ष में संतुष्ट करने में सफल रहे। अधिवक्ता श्री मनोज कुमार अग्रवाल ने यह भी कहा कि इस मामले को सफलतापूर्वक पुर्ण करने में उनके सहयोगी अधिवक्ता द्वय श्री सत्यनारायण बाघ के अलावा एडवोकेट श्रीमती अनिता मनोज, श्रीमती दिक्षा हर्ष एवं असिस्टेंट / भावी - अधिवक्ता श्री अजहर हुसैन का भी अमूल्य सहयोग रहा।


नकली दस्तावेजों के आधार पर जमीन बेचने वाले को न्यायालय ने दिया पाक 5 वर्ष का सश्रम कारावास

 अतिरिक्त‍ लोक अभियोजक श्री सुनील कुरील अभियोजित एक महत्वपूर्ण प्रकरण में मा. अपर सत्र न्यायाधीश श्री आर.के.पाटीदार बुरहानपुर द्वारा आरोपीगण...