मंगलवार, 26 नवंबर 2019

मध्‍यप्रदेश में महंगी होगी शराब, वैट के बाद अब बढ़ाई पांच फीसदी एमआरपी ।

मध्‍यप्रदेश में महंगी होगी शराब, वैट के बाद अब बढ़ाई पांच फीसदी एमआरपी ।



भोपाल। अतिवर्षा और बाढ़ प्रभावितों को राहत देने राशि जुटाने 20 सितंबर को पेट्रोल, डीजल और शराब पर जो पांच फीसदी वैट (वेल्यू एडेड टैक्स) बढ़ाया गया था, उसकी भरपाई शराब कारोबारी मूल्य बढ़ाकर करेंगे। इसके लिए वाणिज्यिक कर विभाग ने भारत और विदेशों में बनी शराब की एमआरपी (अधिकतम ब्रिकी कीमत) में पांच प्रतिशत की वृद्धि करने का फैसला किया है। यह बढ़ोतरी 22 सितंबर से प्रभावी होगी।
सूत्रों के मुताबिक अतिवर्षा और बाढ़ से फसल और अधोसंरचना को जो नुकसान पहुंचा है, उसकी भरपाई के लिए सरकार को अतिरिक्त वित्तीय संसाधन की जरूरत है। इसके मद्देनजर ही पेट्रोल, डीजल और शराब पर सितंबर में पांच-पांच प्रतिशत वैट बढ़ाया गया था। शराब पर बढ़ाए वैट का सीधा असर शराब कारोबारियों पर पड़ा क्योंकि इस वृद्धि की राशि उनसे ही वसूली जानी है। इसके पहले आबकारी नीति में लाइसेंस फीस में 20 प्रतिशत की वृद्धि की गई। बार सहित अन्य लाइसेंस फीस भी बढ़ाई जा चुकी है।
शराब का कारोबार करने वालों ने इस वृद्धि से राहत देने के लिए नीतिगत बदलाव का मुद्दा उठाया था। इसके मद्देनजर विभाग ने कुछ व्यावहारिक बदलाव भी किए हैं। इसके तहत शराब दुकानों को अहाता खोलने की अनुमति सशर्त दी गई है। पर्यटन क्षेत्रों के आसपास के रिसॉर्ट बार से जुड़ी शर्तों में भी तब्दील की जा चुकी है। इसके बाद अब एमआरपी पांच प्रतिशत बढ़ाई गई है। विभाग के प्रमुख सचिव मनु श्रीवास्तव ने बताया कि वैट में जो वृद्धि की गई थी, उसी अनुपात में एमआरपी में बढ़ोतरी की गई है।
वैट के बढ़ने से पड़े भार की हो पाएगी भरपाई
सूत्रों का कहना है कि शराब की एमआरपी बढ़ाने से कारोबारियों को सीधा-सीधा फायदा होगा। दुकानों पर बेचने लाने वाले भारत और विदेशों में बनी शराब पर पांच प्रतिशत वैट बढ़ाया गया था। इससे शराब कारोबारियों ने जिस दर पर टेंडर लिया था, उसकी लागत बढ़ गई। एमआरपी बढ़ने से शराब की कीमत पांच प्रतिशत तक बढ़ जाएगी और जो आय होगा, उससे कारोबारियों के ऊपर आए अतिरिक्त वित्तीय भार की पूर्ति हो सकेगी।
13 हजार करोड़ रुपए का है लक्ष्य
वाणिज्यिक कर विभाग को सरकार ने वर्ष 2019-20 में आबकारी से 13 हजार करोड़ रुपए राजस्व जुटाकर देने का लक्ष्य दिया है। वर्ष 2018-19 में यह नौ हजार 558 करोड़ रुपए था। सितंबर 2019 तक विभाग पांच हजार 390 करोड़ रुपए जुटा चुका है। लक्ष्य के हिसाब से पिछले साल सितंबर तक हुई आय की तुलना में देखा जाए तो यह लगभग एक हजार 885 करोड़ रुपए कम आंका गया है। इसके मद्देनजर विभाग ने राजस्व प्राप्ति का लक्ष्य हासिल करने के प्रयास तेज कर दिए हैं।
साभार 
नईदुनिया


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