रविवार, 1 दिसंबर 2019

कृषि विभाग की किसान भाईयों को सलाह

कृषि विभाग की किसान भाईयों को सलाह
 
गुना |


 

      उप संचालक किसान कल्‍याण तथा कृषि विकास श्री अशोक उपाध्‍याय द्वारा जिले के किसान भाईयों से आग्रह किया गया है कि मृदा स्‍वास्‍थ्‍य कार्ड में सिफारिश की गई मात्रा के अनुसार ही उर्वरक उपयोग करें। एक बीघा क्षेत्र में आधा बेग यूरिया से अधिक नहीं डाला जाये। परंतु कृषकों द्वारा अनावश्‍यक रूप से अधिक मात्रा में यूरिया उर्वरक का उपयोग किया जाता है। जिसका फसल को कोई लाभ प्राप्‍त नहीं हो पाता बल्कि अधिक मात्रा में नाईट्रोजन तत्‍व दिये जाने के कारण पौधों में रोग एवं कीटों के प्रकोप की संभावना बढ़ जाती है। गेहूं फसल में 2 प्रतिशत यूरिया घोल 2 कि.ग्रा. मात्रा 100 लीटर पानी में घोल बनाकर स्‍प्रे करने से यूरिया की उपयोग क्षमता में वृद्धि होती है एवं अधिक उपज प्राप्‍त की जा सकती है।
    उन्‍होंने बताया कि छोटे दाने की अपेक्षा बडा दाना ज्‍यादा लाभप्रद है। क्‍योंकि यूरिया का बडा दाना पानी में धीरे-धीरे घुलता है। जिससे नाईट्रोजन अधिक समय तक पौधों को धीरे-धीरे उपलब्‍ध होता है तथा नाईट्रोजन की उपलब्‍धता पौधों को अधिक समय तक बनी रहती है। नाइट्रोजन उर्वरक की लीचिंग एवं डी नाईट्रिकरण प्रक्रिया के द्वारा नाईट्रोजन की हानि कम होती है।
    उन्‍होंने किसान भाईयों से विशेष आग्रह किया है कि वे चना फसल में यूरिया का उपयोग न करें। क्‍योंकि दलहनी फसलों में नाईट्रोजन का स्‍वत: ही स्थिरीकरण होने से नाईट्रोजन की उपलब्‍धता पौधों में होती है। उन्‍होंने किसान भाईयों को सलाह दी है कि चना फसल की स्थिति कमजोर दिखने पर पानी में घुलनशील एनपीके 19:19:19 का 2 कि.ग्रा. 100 लीटर पानी में घोल तैयार किया जाकर एक हेक्‍टेयर में स्‍प्रे करें।
 


 
 

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