शुक्रवार, 24 जनवरी 2020

मॉ ताप्ती दर्शन पदयात्रा सेवा समिति बैतुल द्वारा माॅ ताप्ती का महत्व बताया, समिति के पदाधिकारियों द्वारा विगत15 वर्षो से पदयात्रा की जा रही है


 बुरहानपुर-  शुक्रवार को पदयात्रियों का जत्था देडतलाई ताप्ती नदी के बगड़ाई घाट पहुच श्रद्धालुओ ने वहाँ स्थित शिव मंदिर और हनुमान मंदिर में दर्शन कर मन्दिर परिसर में आम का पौधा लगया ओर आसपास के लोगो को इस पौधे की परवरिश करने को कहा और ताप्ती नदी का महत्व बताया पदयात्रा में लगभग 50 गावो के 100 से अधिक पदयात्रियों के भाग लिया इस यात्रा में 20 वर्ष की आयु से 95 वर्ष की आयु तक के श्रद्धालु झंडा निसानी लेकर चल रहे है
समिति के कोषाध्यक्ष राजेश दीक्षित ने बताया कि मां ताप्ती का जन्म आषाढ़ माह की शुक्ल पक्ष की सप्तमी के दिन मध्यप्रदेश के बैतूल जिले के मुलताई तहसील में हुआ है सूर्य की पुत्री होने का सौभाग्य माता को मिला है यम , शनि एवं यमुना इनके भाई बहन है  ताप्ती सर्व पाप को हरने वाली हैं अल्प समय में मोक्ष एवं वैभव के साथ सभी मनोकामनाओं को पूरा करने वाली हैं माँ ताप्ली के वैभव को जन - जन पहुंचाने एवं इनके किनारा बसने वाले ग्रामो के ग्रामीण जनों से मिलकर मा ताप्ती  के प्रति आस्था रखने इन्हें स्वच्छ रखने , प्रदूषण मुक्त करने एवं नदी के दोनों किनारों पर पेड़ लगाने हेतु प्रेरित करने के उददेश्य से पदयात्रा कर रहे है माँ ताप्ती दर्शन यात्रा समिति 14 वर्ष पूर्व 2006 में एवं एक छोटा सा प्रयास था आज यह पदयात्रा लगभग 1000 किलोमीटर तक की हो गई है । माँ ताप्ती की पदयात्रा 15 जनवरी 2020 दिन सोमवार प्रातः 8 . 00 बजे मुलताई उदगम से प्रारम्भ होकर गुजरात प्रान्तक सूरत शहर के अंतिम छोर ताप्ती संगम तक होती हैं माँ ताप्ती के प्रति आस्था रखने श्रद्धालुओं के द्वारा मुलताई ( बैतूल ) से पदयात्रा प्रति वर्ष 15 जनवरी से प्रारंभ की जाती है । यह पद यात्रा लगभग सवा माह की होती है जो कि मध्यप्रदेश के बैतूल , खण्डवा , बरहानपुर जिले के तटों पर स्थित मंदिर और गांवों से होकर गुजरती हैं इसके बाद महाराष्ट्र के जलगाँव , धुलिया एवं नन्दूरबार जिले के ग्रामो से गुजर कर गुजरात के तापी , नर्मदा एवं सूरत जिले के ग्रामों से होकर उद्गम स्थल से संगम तक पहुंचती है माँ ताप्ति ( ताप्ती , तापी नदी ) का वेद , पुराणों में व्यापक महिमा एवं गुणगान मिलता है साथ ही नदी का सम्पूर्ण तट तपोभूपि ( तपस्थल ) है । जगह - जगह ऋषियों की तो स्थली दृष्टि गोचर होती है जिसमें भगवान परसूराम , देवर्षि नारद सांडिल्य , देवल , चांगदेव , मार्कण्डेय , उबदालक , विश्वामित्र , गौतम , दुर्वासा , आदि कई नामचिन ऋषियों के साथ - साथ देवी स्वरूपा सप्तशृंगी माता की जन्म स्थली , संत मुक्तामाई स्थली मेहूण सहित धूनीवाले दादाजी की गुरू परम्परा बढ़ाने वाले स्वामी रेवानंद दादाजी आम्बाका स्वामी भक्तानंद दादाजी निमग्वान , स्वामी पंडितानंद दादाजी पलसोद आदि पुण्यदायी स्थल के साथ - साथ जीवन को प्रकाशित करने वाले सनातन महत्व को बढ़ाने वाले प्रकाशा नगर जिस आदि काशी , दक्षिण काशी भी कहा जाता है ऐसे जीवन को धन्य बनाने वाले कई तटो से होकर यह दर्शन पदयात्रा लगभग सवा माह में अपना सफर पूर्ण करेगी 
महाशिवरात्रि के बाद मार्च के महीने में हमारे समिति के कुछ लोग नदी की दूसरी ओर का सर्वे करेंगे और आने वाले वर्षों से  ताप्ती परिक्रमा करेंगे दोनों और के किनारों पर बसे हुए गांव में घूम कर हमारे उद्देश्य को पूरा करेंगे


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