बुधवार, 19 फ़रवरी 2020

*केंद्रीय हज कमेटी का दावा असत्य कि हज का कार्य सत प्रतिशत डिजिटल हो गया है* *मध्य प्रदेश हज वेलफेयर सोसाइटी के चेयरमैन मुकीत खान का आरोप*

 


बुरहानपुर (मेहलक़ा अंसारी) मध्य प्रदेश हज वेलफेयर सोसाइटी के चेयरमैन मुकीत  खान(खंडवा)ने केंद्रीय हज मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी के उस दावे को असत्य बताएं बताया है जिसमें उन्होंने कहा था कि "  हज का काम 100 प्रतिशत डिजिटल हो गया है " प्रदेश के दूरदराज के हाजियों की पीड़ा बयान करते हुए चेयरमैन मुकीत खान ने कहा कि  जब लोग हज स्टेट हज कमिटियों में अपने ओरिजनल पासपोर्ट जमा कराने दूर दराज़ से पहुँचतें हैं तो उन्हें वहां अनेक व्यवहारिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है जिनके आधार पर यह कहा जा सकता है कि केंद्रीय हज  मंत्री का डिजिटल होने का दावा पूर्णता असत्य है ।


मुकीत खान ने कहा कि जब हज यात्री स्टेट हज कमिटियों में हज फार्म की हार्ड कॉपी के साथ पासपोर्ट की फ़ोटो कॉपी, बैंक पासबुक की कॉपी, यहाँ तक की 300/-  प्रति सदस्य के मान से रजिस्ट्रेशन फीस की मांग भी की जा रही है ।  अगर ये सब आपके पास नही है तो स्टेट हज कमेटी फार्म लेने से साफ इंकार कर देगी । हज वेलफेयर सोसायटी के चेयरमैन मुकीत खान ने कहा कि  जब हज के फार्म भरे गए थे, तब सभी  संलग्न किये जाने वाले कागज़ात भी अपलोड किए गए थे, अब मूल पासपोर्ट लेते समय उपरोक्त दस्तावेज लेने का कोई औचित्य नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि स्टेट हज कमिटियों में लोग परेशान हो रहे हैं और ज़्यादातर लोग जो फार्म और मूल  पासपोर्ट लेकर पहुंच रहे हैं, उन्हें वापस कर दिया गया ।


उन्होंने याद दिलाया कि इस साल से हज के फार्म ऑन लाईन कर दिए जाने के बाद भी लोगों में कोई ज़्यादा जोश या उत्साह नज़र नही आया । एम.पी.ऑन लाइन सेंटरों में लगने वाली लम्बी भीड़, मनचाहे पैसों की वसूली और उसके बाद भी कई फार्मों में गलती होने से लोगों का रुझान ही नही बन पाया । परेशान हुए वे लोग जो आसपास गांव देहात के लोग थे । बहुत सी जगह कोई सोश्यल वर्कर्स की टीम न हो पाना, ज़िला हज कमेटियों तक राब्ता कायम न हो पाना भी इसकी वजह बना । बहुत से स्टेट ऐसे भी रहै जहाँ पिछले सालों की अपेक्षा इस वर्ष  फार्म कम भरे गए हैं।  यहाँ तक कि केंद्रीय हज कमेटी द्वारा 3 बार हज फार्म की तिथि में वृद्धि करने के बाद भी पर्याप्त मात्रा में लोगों ने फॉर्म नहीं भरा ।  


हज के काम को 100 प्रतिशत डिजिटल किया जाना अपने मुँह मियाँ मिट्ठू बनने जैसी कहावत साबित हो रही है, बेहतर तो यही होता ऑन लाइन के साथ ऑफ लाईन का सिस्टम भी पूर्व परंपरा अनुसार चालू रखा जाता ताकि लोगों को आसानी हो। हज का काम सम्हाल रहै ज़िम्मेदारों द्वारा सारे नियम एक दम से थोपे जाने के बाद अपने ही हाथों से खुद की पीठ थप थपाने से बाज़ नही आ रहे हैं । हज वेलफेयर सोसायटी के पदाधिकारियों की मांग पर केंद्रीय मंत्रालय एवं इसके अधीन चलने वाली समस्त संस्थाओं को इस बात पर मंथन करना और कुछ सुधार करना आवश्यक प्रतीत होता है ।