शनिवार, 11 अप्रैल 2020

लाक डॉउन ने तोड़ी बुरहानपुर स्थित टेक्सटाइल उद्योग की कमर, पड़ेगा 65000 लोगों के रोजगार पर सीधा असर*        

                                   


बुरहानपुर (मेहलका अंसारी) टेक्सटाइल प्रोसेसर्स एसोसिएशन, बुरहानपुर के अध्यक्ष डॉक्टर राजेश बजाज ने कोरोना संकट एवं देश की वर्तमान लाक डाउन के परिप्रेक्ष्य में कहा कि बुरहानपुर में अर्थव्यवस्था आज  अपने निम्न स्तर पर आ चुकी है। बुरहानपुर में रोजगार का प्रथम स्त्रोत टेक्सटाइल से जुड़े सुक्ष्म, लघु एवं उद्योग MSME से जुड़े कारखाने पूर्ण रूप से बंद हैं और किसी भी प्रकार का कारोबार नहीं हो रहा है। टेक्सटाइल प्रोसेसर्स एसोसिएशन, बुरहानपुर के अध्यक्ष डॉक्टर राजेश बजाज ने बताया कि यह उद्योग पिछले 2  वर्ष से अपने अस्तित्व के लिए जद्दोजहद कर रहे हैं और इसके उपरांत सरकारी आदेश आ गया है कि सभी श्रमिकों को बैठी पगार दी जाए ।



यह कहां तक व्यवहारिक रूप से संभव है ? यहां कई कारखाने वालों को अपनी अपने अधीनस्थ कर्मचारियों की आजीविका रोज के उत्पादन पर ही निर्भर रहती है, तो इन परिस्थितियों में पूर्ण वेतन देना बिल्कुल भी तर्कसंगत नहीं है । श्रमिकों को सवैतनिक अवकाश देने का भार ईएसआईसी(ESIC)  आना चाहिए क्योंकि यही वह संस्था है, जो श्रमिकों को बेरोजगारी भत्ता एवं बीमारी में हित लाभ देते आई है। एसोसिएशन के संरक्षक श्री सैयद फरीद सेठ ने कहा कि इस 21 दिन के लाक डाउन में कोई भी कारखाना नहीं चला है । आगे भी चलाने में विकट परिस्थितियों का सामना करना पड़ेगा। ऐसे में राज्य शासन से बार-बार यह अनुरोध किया गया है कि आने वाले 3 माह के बिजली के बिल में 50% की रियायत प्रदान की जाए एवं जो फिक्स चार्ज लगता है उसे भी हटाया जाए अन्यथा उद्योग बिल भरने में असमर्थ होंगे। सैयद फरीद सेठ ने कहा कि सभी कारखाने ने दीगर बैंकों से किसी ना किसी रूप में लोन लिया हुआ है, तो सरकार आने वाले दो-तीन महीने के लिए इन्हें ब्याज मुक्त करने के आदेश बैंकों को दे। रोने उन्होंने यह भी कहा कि सरकारी सुविधाएं हर जगह मिल रही हैं, हम उनका स्वागत करते हैं । लेकिन बुरहानपुर मध्य प्रदेश का सबसे बड़ा टेक्सटाइल हब है । एवं यहां 50% रोजगार प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से टेक्सटाइल उद्योग जुड़ा है जिनमें प्रमुख रूप से लगभग 50,000 पावर लूम बंद कर एवं 15000 श्रमिक आते हैं। इन उद्योगों की तरफ़ भी ध्यान रखना अति आवश्यक काम है। नहीं तो इतने बड़े स्तर पर बेरोजगारी उत्पन्न हो गई तो वह प्रशासनिक स्तर पर भी एक बहुत बड़ी समस्या उत्पन्न करेगी ।



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