गुरुवार, 11 जून 2020

क्या हम अब भी कोरोना को लेकर सीरियस है ? बुरहानपुर वासियों से विनम्र अपील- मुकुल भाटिया


मेरे प्यारे बुरहानपुर वासियों, एक विनम्र अपील आप सभी टीवी के न्यूज चैनल देखते है, समय के बीतने के साथ साथ कोविड 19 की वजह से बड़े शहरों की स्थितियां बेहद भयावह होती जा रही है । हम लोग अभी बहुत छोटे शहर में है, जहां मेडिकल सुविधाएं भी ठीक ही है । लेकिन जिस दिशा में ये शहर जा रहा है, अब डर लगने लगा है लगभग 300+ कोरोना पेशेंट के बावजूद बाजारों में जो भीड़ और लापरवाही देखने मिल रही है उससे ऐसा लगता है बहुत जल्द परिस्थितियां बेकाबू होगी । क्या हम अब भी कोरोना को लेकर सीरियस है ? प्रश्न अपने आप से पूछिए, क्योंकि कोई भी मजबूरी अपने या अपनों की जान से ज्यादा बड़ी नहीं हो सकती । अब प्राइवेट हॉस्पिटल भी जल्दी केस नहीं लेते भले ही आप कोरोना पीड़ित न भी हो । साधारण सर्दी, खांसी, बुखार में भी फैमिली डॉक्टर और मेडिकल स्टोर दवाई देने को मना कर देते है । सरकारी सिस्टम अभी बहुत अच्छा है बुरहानपुर में, लेकिन कब तक ? जब तक सीमित साधनों में मरीज कम है तब तक । जिस तरह बाजार में लोग घूम रहे है, लोगों की लापरवाही दिखती है । पिछले 70 सालों में पहली बार प्रशासन दुरुस्त, और जनता सुस्त दिखी है । अब जनता को भी दुरुस्त होना ही पड़ेगा । 3 छोटी सावधानियां :1 मास्क नाक और मुंह पर (गले पर नहीं), 2 दो मीटर की दूरी 3 हर 1 घंटे में हाथ धोना क्या इतनी छोटी सी बात भी बार बार समझाने की जरूरत है ? अब भी बाजार में रोज बिना मास्क के लोग घूम रहे है, और जो लोग मास्क या गमछा लगाए हैं वो गले पर, पुलिस के डर से । किसे धोखा दे रहे है ? प्रशासन को या अपने आप को ? ऐसे लोगों की वजह से ही अच्छे नागरिक 3 महीने से घर में बंद रहने को मजबुर है । अगर 15 दिन ईमानदारी से पूरा बुरहानपुर ठान ले तो कोई कारण नहीं की बाजार 21 दिन में पूरी तरह खोल दिए जाएं । तो क्या बुरहानपुर तैयार है, अपने आप को बदलने के लिए !


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