सोमवार, 16 दिसंबर 2019

1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध पर चर्चा -

















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1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध पर चर्चा
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बड़वानी | 


 

    शहीद भीमा नायक शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, बड़वानी में स्वामी विवेकानंद कॅरियर मार्गदर्षन प्रकोष्ठ द्वारा प्राचार्य डॉ. आर. एन. शुक्ल के मार्गदर्षन में 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में मिली भारत की विजय की 48 वीं वर्षगाँठ के अवसर पर चर्चा का आयोजन किया गया। इसमें डॉ. मधुसूदन चौबे ने युद्ध के लिए जिम्मेदार परिस्थितियों, पष्चिमी पाकिस्तान द्वारा पूर्वी पाकिस्तान के प्रति भेदभावपूर्ण और अत्याचारपूर्ण दुर्व्यवहार, 1970 के चुनाव में पूर्वी पाकिस्तान में शेख मुजीबुर्रहमान की आवामी लीग पार्टी को बहुमत मिलने के बावजूद सत्ता से परे रखते हुए जेल में डाल देना, पाकिस्तानी सेना द्वारा नरसंहार तथा महिलाओं के साथ ज्यादतियां, मुक्तिवाहिनी का आंदोलन, शरणार्थियों का भारत में बड़ी संख्या में आगमन, पाकिस्तानी सेना द्वारा भारतीय क्षेत्रों में आक्रमण कर युद्ध के लिए पहल और बाद में भारत द्वारा जवाब के बारे में बताया। इसमें संयुक्त राज्य अमेरिका और सोवियत संघ के दृष्टिकोणों पर भी प्रकाष डाला। उस समय भारत की प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी और सेनाध्यक्ष सैम मानेकषॉ थे। पाकिस्तान की सत्ता याहिया खान के हाथों में थी। अंततः भारत की जीत हुई और 16 दिसम्बर, 1971 को पाकिस्तान की ओर से लेफ्टिनेंट जनरल ए.ए.के. नियाजी ने ढाका में भारत के लेफ्टिनेंट जनरल जगजीत सिंह अरोड़ा के समक्ष अपने लगभग 93000 सैनिकों के साथ आत्मसमर्पण कर दिया। पूर्वी पाकिस्तान एक नये देष बांग्लादेष के रूप में सामने आया। सहयोग प्रीति गुलवानिया, राहुल मालवीया, रवीना मालवीया, कोमल सोनगड़े, अजय पाटीदार, जितेंद्र चौहान ने किया।






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