शनिवार, 22 फ़रवरी 2020

मनुष्य जीवन गर्व से नही अच्छे कर्मो से सफल बनता है- महामंडलेश्वर स्वामी जनार्दन हरीजी महाराज


 


 बुरहानपुर-   शाहपुर क्षेत्र के ग्राम चापोरा मे महाशिवरात्री के उपलक्ष मे प्रतिवर्षानुसार तीन दिवसीय महाशिवरात्री महोत्सव एवं सत्संग समारोह  के समापन दिवसपर महाशिवरात्री के दिन व्यासपिठ पर विराजित कथावाचक गुरुवर्य महामंडलेश्वर स्वामी जनार्दन हरीजी महाराज के अमृतवाणी से कथा मे बताया की मनुष्य शरीर की सभी क्रियाओं को जिवित रखने के लिए भगवान की कृपा दृष्टी से ही शरीर जिवित रहता है। परंतु मनुष्य को गर्व होता है की मैं देख रहा हु, मैं सुन रहा हू, मै बोल रहा हू, मैं जिवित इंसान हू यह भ्रम मनुष्य ने अपने जिवन से निकाल देना चहिए भगवान का वास अगर इस गर्व शरीर से निकल जाये तो मनुष्य शरीर की सभी प्रकार की क्रियाए समाप्त हो जाती है ।



वह शरीर दुसरो को देखना, दुसरो को पहचानना, दुसरो को सुनना एवं दुसरो से बात करना समाप्त हो जाता है अर्थात उस शरीर मे से भगवान की कृपा दृष्टी समाप्त हो जाती है उस शरीर का कोई महत्व नही रहता है। व कथा के अंत मे गुरुवर्य जनार्दनजी महाराज ने महान योध्दा श्री छत्रपती शिवाजी महाराज एवं माता जिजाऊ के जिवन चरित्र पर प्रकाश डालते हुए बताया की माता जिजाऊ के आज्ञा का पालन पुत्र् शिवाजी महाराज ने  धर्म का रक्षन एवं स्वराज्य स्थापना के लिए शिवाजी महाराज एवं मावळो का बहुत बडा योगदान रहा है धर्म रक्षण एवं स्वराज्य स्थापन के लिय हुए कथा मे छत्रपती शिवाजी महाराज, माता जिजाऊ एवं रक्षक मावळो की सजीव झाकिया घोडो पर सवार होकर कथा स्थल पर आगमन करने पर सभी उपस्थीत श्रध्दालुओं ने पुष्पवर्षा से स्वागत किया गया। कथावाचक महाराज ने कहा की अगर हमारी सभी माताए मन से चाहती है की हमे शिवाजी जैसा आज्ञाकारी पुत्र होना चाहिए तो सभी माताओं को माता जिजाऊ के जैसे विचार एवं कर्म का पालन करना होगा।



कथा मे पुर्व विधायीका एवं पुर्वमंत्री अर्चना चिटनीस ने कथा सुनकर कथावाचक गुरुवर्य जनार्दनजी महाराज का दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया साथ ही वीर शिवाजी, माता जिजाऊ की सजिव झाकियो की प्रशंसा की। अंत मे कथा आयोजक समिती ने  कथा मे उपस्थित सभी श्रध्दालुओं का आभार व्यक्त किया