शुक्रवार, 12 फ़रवरी 2021

दुष्कर्म के आरोपी को न्यायालय ने दी 10 साल की सजा*

 राजगढ। जिला न्यायालय में पदस्थ माननीय विशेष न्यायाधीश पाॅक्सो एक्ट श्रीमति अंजली पारे ने थाना जीरापुर के अपराध क्रमांक 71/17  में अभियुक्त दीपक निवासी जीरापुर को 10 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा तथा 5 हजार रू के अर्थदंड से दण्डित किया है


  घटना की जानकारी देते हुये अभियोजन के जिला प्रमुख आलोक श्रीवास्तव ने बताया है कि चाईल्ड लाईन राजगढ़ में टीम सदस्य ने तहसील न्यायालय जीरापुर का पत्र थाना राजगढ में अपराध पंजीबद्ध कराने हेतु प्रस्तुत किया और रिपोर्ट लेख कराई कि श्रम पदाधिकारी जिला राजगढ़ को सूचना प्राप्त हुई थी कि कृष्णाबाई द्वारा अपने घर पर 11 वर्षीय बालिका के इच्छा के विरूध्द रखा गया है। इस सम्बंध में चाइल्ड लाईन राजगढ़ के सदस्यों द्वारा जांच की गई एवं कथन अंकित किये थे। जिसमें पीडित बालिका के पिता द्वारा बताया गया कि मैंने कृष्णाबाई से 10 हजार रूपये उधार लिये थे । सात हजार रूपये लोटा दिये है लेकिन 3000 रूपये वापस नही किये है। बालिका, कृष्णाबाई के निवास पर निवास करती है पीडित बालिका ने अपने कथनों में बताया कि कृष्णाबाई मुझसे साफ सफाई व घरेलू कार्य कराती है ,खाना नही देती है बचा खुचा खाना देती है कृष्णाबाई एवं उनके परिवार के सदस्य का कार्य ,व्यवहार अच्छा नही है इस कारण से पीडित बालिका, कृष्णाबाई के साथ नहीं रहना चाहती है इस कारण से पीडिता को चाइल्ड टीम राजगढ़ के सदस्य काउंसलर व टीम सदस्य के सुपूर्दगी में सौंपी गई है । उक्त आवेदन पत्र पर अपराध कायम कर विवेचना प्रारंभ की गई थी। अपराध धारा 75 बालको का सरक्षण अधिनियम 2015 का होना पाया गया था। पीडित के कथनों और दस्तावेजों के आधार पर प्रकरण में धारा 376 भादवि एवं पाॅक्सो एक्ट का इजाफा किया गया और पीडित बालिका को उसके माता-पिता के सुपुर्द किया गया।  विवेचना उपरांत चालान न्यायालय प्रस्तुत किया गया।


प्रकरण में पीडित बालिका के साथ घटित अपराध के संबंध में न्यायालय में आरोप विरचित कर अभियोजन की साक्ष्य प्रारंभ की गई। अभियोजन की ओर से अपनी साक्ष्य के प्रथम चरण में पीडित बालिका के कथन कराये गये, जिसमें पीडित बालिका एवं अन्य महत्वपूर्ण साक्षियों ने न्यायालय के समक्ष पक्षविरोधी होकर कथन किये हैं।


पैरवी कर्ता विशेष लोक अभियोजक- पाॅक्सो एक्ट ने बताया कि पीडित बालिका के न्यायालय में पक्षद्रोही होकर कथन करने के उपरांत पीडित बालिका द्वारा माननीय न्यायालय को दी गई आंशिक किंतु अखण्डित साक्ष्य के आधार पर आरोपी दीपक को 10 वर्ष सश्रम कारावास एवं 5000 रू अर्थदंड से दंडित किया है। इस प्रकरण में कृष्णाबाई को साक्ष्य के अपर्याप्त होने के आधार पर दोषमुक्त किया गया है। 


  प्रकरण में राज्य की ओर से पैरवी जिला अभियोजन अधिकारी आलोक श्रीवास्तव ने की है।