गुरुवार, 4 फ़रवरी 2021

सामूहिक दुष्कर्म में जीवन भर का कारावास* *9 वर्षीय अबोध बालिका से किया था दुष्कर्म* *दो सगे भाईयों को हुई सजा*


  राजगढ। माननीय न्याायालय विषेष न्यायाधीष पाॅक्सो एक्ट एवं तृतीय अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश डाॅ0 अंजली पारे राजगढ ने अपने न्यायालय के एक प्रकरण में अहम फैसला सुनाते हुये 9 वर्षीय अबोध बालिका से दुष्कर्म करने वाले आरोपी रविन्दर (परिवर्तित नाम) एवं घटना के समय जांच रख रहे आरोपी जयदीप (परिवर्तित नाम) सर्व निवासी हिरणखेड़ी जिला राजगढ को शेष प्राकृत जीवनकाल तक के कारावास से दण्डित किया है।


अभियोजन मीडिया प्रभारी श्री आशीष दुबे राजगढ ने घटना की जानकारी देते हुये बताया है कि दिनांक 08.05.2020 को फरियादी ने थाना राजगढ में रिपोर्ट दर्ज कराई कि उक्त दिनांक को पीडित बालिका उम्र 9 साल जो कि मेरी ननद है रोते हुये बेहाल हालत में घर पर आई जिसने सलवार नहीं पहन रखी थी। मैने पीडित बालिका से पूछा तो उसने रोते हुये बताया कि मैं खेत पर से घर आ रही थी रास्ते में नाले के पास पेड के नीचे गांव का रविन्दर (परिवर्तित नाम) मिला और बोला कि तुझे 100 रूपये दूंगा तू मेेरे साथ चल मैने जाने से मना किया तो वह जबरदस्ती मेरा हाथ पकड़कर नाले में ले गया, मै चिल्लाने लगी तो मेरा मुंह दबा दिया और गलत काम किया, जिससे मुझे दर्द होने लगा था। फरियादिया की रिपोर्ट पर थाना राजगढ में अपराध क्रमांक 230/2020 धारा 376एबी,376(2)आई, 376(2)एन भादवि एवं 5/6 पाॅक्सो एक्ट के तहत कायम कर विवेचना में लिया गया था। विवेचना के दौरान पीडित बालिका के पूरक कथन लिये गये जिसमें उसने बताया था कि घटना के समय जयदीप (परिवर्तित नाम)  जांच रख रहा था कि कोई आ तो नहीं रहा हैं। विवेचना उपरांत अभियोग पत्र विचारण हेतु न्यायालय मे प्रस्तुत किया गया। माननीय न्याायालय श्रीमति अंजली पारे राजगढ ने रविन्दर (परिवर्तित नाम) और जयदीप (परिवर्तित नाम) पर आरोप गठित कर विचारण प्रारंभ किया ।

इस प्रकरण में शासन की ओर से पैरवी जिला लोक अभियोजन अधिकारी श्री आलोक श्रीवास्तव राजगढ ने की है। श्री श्रीवास्तव ने प्रकरण में सिलसिलेवार तरीके से गवाहों की साक्ष्य करवाकर एवं प्रकरण के अतिंम चरण में लिखित बहस प्रस्तुत कर आरोपियों को सजा दिलवाई है।

       विशेष लोक अभियोजक श्री आलोक श्रीवास्तव द्वारा माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा पारित न्यायदृष्टांतों का हवाला देकर पीठासीन न्यायाधीष से आरोपी रविन्दर (परिवर्तित नाम) को मृत्युदण्ड की मांग की थी जिस पर बचाव पक्ष के विद्वान अधिवक्ता ने घोर आपत्ति करते हुये व्यक्त किया कि अभियुक्त नवयुवक है इस कारण उसके सामने अभी पूरी जिंदगी है इस कारण उसे कम से कम सजा दी जावे।  


 माननीय न्यायालय के पीठासीन अधिकारी द्वारा आरोपी रविन्दर (परिवर्तित नाम) और जयदीप (परिवर्तित नाम)  को शेष प्राकृत जीवनकाल तक के कारावास से दण्डित किया है। 


(आषीष दुबे)

       मीडिया प्रभारी

लोक अभियोजन कार्यालय जिला राजगढ

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